विज्ञापित ब्याज से आगे कुल लागत देखें: केवल बताए गए ब्याज दर के आधार पर कर्ज का निर्णय न लें। उधार लेने की वास्तविक लागत में प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, ऋण सुरक्षा बीमा, जीएसटी, किस्तों की संख्या और कुल समय सीमा शामिल होती है। दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने से पहले हमेशा 'कुल पुनर्भुगतान राशि' (Total Repayment Amount) का पता लगाएं।
फ्लैट दर बनाम घटती शेष राशि (Reducing Balance): सावधान रहें: 12% की 'फ्लैट दर' पूरे समय के लिए मूल राशि पर ही ब्याज लगाती है, जिससे वास्तविक वार्षिक ब्याज (APR) 22% से 24% तक पहुंच जाता है! जबकि घटती शेष राशि (Reducing Balance) पद्धति में हर किस्त जमा होने के बाद केवल बची हुई मूल राशि पर ही ब्याज लगता है, जो काफी सस्ता पड़ता है।
साहूकारी उधार बनाम संस्थागत सूक्ष्म-ऋण: स्थानीय साहूकार अक्सर '₹100 पर ₹5 प्रति माह' (60% सालाना) या मीटर ब्याज लेते हैं, जिसमें हर दिन केवल ब्याज ही चुकता होता है और मूल कभी घटता नहीं। रिनसेतु जैसे धारा 8 संस्थान की पारदर्शी दैनिक किस्तों में मूल और ब्याज दोनों साथ-साथ घटते हैं और कोई छिपा हुआ शुल्क नहीं होता।
केएफएस (KFS) का मिलान करें: आरबीआई द्वारा अनिवार्य मानकीकृत केएफएस को अपने मूल्यांकन का आधार बनाएं। इसमें वार्षिक लागत प्रतिशत (APR) और कुल देय राशि साफ़ लिखी होती है। यदि कोई ऋणदाता अनुबंध से पहले लिखित केएफएस देने से मना करे, तो वहां से कर्ज न लें।
फोरक्लोज़र व समय पूर्व भुगतान के नियम: शाखा कर्मियों से पूछें कि यदि आपके पास पहले पैसा आ जाए और आप समय से पूर्व पूरा कर्ज चुकाना चाहें, तो कोई अतिरिक्त पेनल्टी फीस तो नहीं लगेगी। रिनसेतु पारदर्शी नियमों का पालन करता है ताकि आप बिना किसी डर के समय पर कर्जमुक्त हो सकें।
