डिजिटल भुगतान से व्यापार में वृद्धि: दुकान पर यूपीआई (UPI) क्यूआर कोड रखने से छुट्टे पैसों की झंझट खत्म होती है, युवा व नए ग्राहक आकर्षित होते हैं और बैंक खाते में औपचारिक लेन-देन का रिकॉर्ड बनता है, जिससे भविष्य में कम ब्याज पर बैंक लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
फर्जी स्क्रीनशॉट धोखाधड़ी से सावधान: शातिर धोखेबाज़ फेक पेमेंट जनरेटर ऐप के ज़रिए हूबहू असली जैसी स्क्रीन दिखाते हैं—जिसमें आपकी दुकान का नाम, सही रकम और हरा टिक मार्क दिखता है। ग्राहक के मोबाइल की स्क्रीन देखकर माल थमा देना भारी नुकसान और गलती है!
केवल अपने साउंडबॉक्स या बैंक संदेश पर भरोसा करें: डिजिटल भुगतान पूरा होने की एकमात्र विश्वसनीय पुष्टि आपके काउंटर पर लगे आधिकारिक साउंडबॉक्स की स्पष्ट आवाज़ (जैसे 'पेटीएम/फोनपे पर ₹250 प्राप्त हुए') या आपके अपने मोबाइल पर आया अधिकृत बैंक एसएमएस/नोटिफिकेशन है।
स्वर्ण नियम: पैसे पाने के लिए कभी यूपीआई पिन न डालें: यूपीआई पिन (PIN) केवल और केवल तभी दर्ज करना होता है जब आप अपने बैंक खाते से किसी को पैसे भेज रहे हों। किसी से भी पैसे, कैशबैक या रिफंड प्राप्त करने के लिए कभी भी पिन दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। यदि कोई कहे कि 'पैसे लेने के लिए क्यूआर स्कैन करके पिन दबाएं', तो वह 100% ठग है।
क्यूआर कोड व मोबाइल की सुरक्षा: दुकान के क्यूआर कोड स्टैंड को लैमिनेट कराकर सीधे अपनी आँखों के सामने काउंटर पर रखें। रोज़ सुबह जांचें कि किसी ने आपके असली कोड के ऊपर अपना कोई दूसरा स्टिकर तो नहीं चिपका दिया। व्यावसायिक फोन का स्क्रीन लॉक सुरक्षित रखें और ओटीपी (OTP) किसी से साझा न करें।
